• इस ऐप से पर्सनल डेटा चोरी होता है, कई जगहों पर किया जा चुका है बैन
  • जूम ऐप में चीन के सर्वर का इस्तेमाल, 100 लोग एकसाथ कर सकते हैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

दैनिक भास्कर

Apr 16, 2020, 07:14 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के चलते भारत में लॉकडाउन चल रहा है। कंपनियों और कई राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग घर से काम कर रहे हैं। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जूम ऐप का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जा रहा है। यह एक फ्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप है। इसके जरिए यूजर एक बार में 100 लोगों से बात कर सकता है। लेकिन, अब यह खबरें सामने आ रही हैं कि इसका इस्तेमाल सुरक्षित नहीं है। बताया जा रहा है कि इस ऐप के जरिए पर्सनल डाटा आसानी से चोरी किया जा सकता है। वीडियो कॉलिंग भी हैक की जा सकती है। गुरुवार को गृहमंत्रायल ने इस ऐप के इस्तेमाल को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। कहा गया है कि यह एप सुरक्षित नहीं है। इससे कोई भी सरकारी मीटिंग नहीं की जाएगी, इसका इस्तेमाल कोई ना करे।

भारत में साइबर सिक्युरिटी की नोडल एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटीएन) ने जूम का इस्तेमाल करने वाले भारतीयों को चेतावनी जारी की थी। कनाडा के रिसर्च ऑर्गनाइजेशन सिटिजन लैब ने भी पाया था कि इस ऐप पर विडियो लिंक के लिए इंक्रिप्शन और डिस्क्रिप्शन ‘की’ डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए चीन के सर्वर का इस्तेमाल होता है।
इंड टू इंड इंक्रिप्टेड नहीं है यह ऐप
जूम ऐप इंड टू इंड इंक्रिप्टेड नहीं है। इंड टू इंड इनक्रिप्टेड का मतलब यह है कि इसमें मैसेज भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता है। जूम में ऐसा नहीं है। इसे आसानी से हैक किया जा सकता है। यानी तीसरा शख्स भी आसानी से मैसेज पढ़ सकता है। व्हाट्सएप इंड टू इंड इंक्रिप्टेट मैसेजिंग ऐप है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ब्लाइंड के मुताबिक, सुरक्षा चिंताओं को लेकर 12 प्रतिशत यूजर्स ने इस ऐप का इस्तेमाल बंद कर दिया है। 35 प्रतिशत प्रोफेशनल्स को डेटा चोरी होने की आशंका है।

गृह मंत्रालय ने दी यूजर्स के लिए सलाह

1- इतनी बड़ी संख्या में खामियां सामने आने के बाद सबसे पहली और सलाह कि जूम का यूज करने से बचें।

2- अगर इस्तेमाल कर रहे हैं तो हर मीटिंग के लिए नई यूजर आईडी, पासवर्ड का इस्तेमाल करें।

3- वेटिंग रूम फीचर को एनेबल करें, ताकि कोई भी यूजर तभी कॉल में शामिल हो सके जब कॉन्फ्रेंस करने वाला अनुमति दे।

4-  ज्वाइन ऑप्शन को डिसेबल कर दें।

5- स्क्रीन शेयरिंग का ऑप्शन सिर्फ होस्ट के पास रखें।

6- किसी व्यक्ति के लिए रिज्वाइन का ऑप्शन बंद रखें।

7- फाइल ट्रांसफर के ऑप्शन का कम से कम इस्तेमाल करें।

ऐप से वीडियो कॉलिंग के कई वीडियो इंटरनेट पर मौजूद
वॉशिंगटन पोस्ट ने जूम ऐप को लेकर एक अध्ययन किया है। इसमें पाया गया कि इस ऐप से वीडियो कॉलिंग और मीटिंग के बहुत सारे वीडियो इंटरनेट पर मौजूद हैं। हैरानी की बात यह है कि ये वीडियो ऐप इस्तेमाल करने वालों ने ही नहीं डाले। सवाल ये है कि फिर ये लीक कैसे हुए। सिक्युरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसे बहुत सारे टूल्स हैं, जिससे इंटरनेट पर जूम वीडियो ढूंढकर लाया जा सकता है। एक खास बात और है कि जूम ऐप के फाउंडर एरिक युआन चाइनीज अमेरिकन है। उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए अपने इंटरव्यू में इस बात को लेकर माफी भी मांगी है। उन्होंने वादा किया है कि वे तीन महीनों के भीतर इसके सभी सिक्युरिटी इश्यू हल करेंगे।

ब्रिटेन में जूम से हुई कैबिनेट मीटिंग भी इंटरनेट पर आ गई थी
भारत के प्रमुख साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट पवन दुग्गल के मुताबिक, “सरकार, नेताओं और कार्पोरेट से जुड़े लोगों को इस ऐप इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसका चीन से लिंक बहुत चिंताजनक है। ब्रिटेन में इसी ऐप के जरिए कैबिनेट मीटिंग हुई थी। ये थोड़ी देर में ही इंटरनेट पर आ गई थी।” 

अमेरिका में ऐप पर मुकदमा, जर्मनी ने इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया
अमेरिका में इस ऐप पर मुकदमा दायर किया गया है। कहा गया है कि इसका डेटा फेसबुक के साथ शेयर हो रहा है। साथ ही इस ऐप से यूजर के वेबकैम को हैक किया जा सकता है। जर्मनी के विदेश मंत्रालयन ने भी जूम एप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ दिग्गज सर्च इंजन गूगल और एलन मस्क की स्पेस एक्स एजेंसी ने भी इस ऐप को बैन किया हुआ है। सिंगापुर ने भी टीचर्स के लिए इस ऐप के इस्तेमाल पाबंदी लगा दी है। 

तीन महीनों में 20 गुना बढ़े एक्टिव यूजर्स
दुनियाभर में हुए लॉकडाउन के कारण वर्क फ्राम होम की शुरुआत हुई है। इसके बाद इस ऐप को बेतहाशा फायदा हुआ है। दिसंबर 2019 में इसके एक्टिव यूजर्स एक करोड़ थे, जो तीन महीने में बढ़कर 20 करोड़ हो गए। साथ ही इन्हीं तीन महीनों में जूम ऐप के फाउंडर एरिक युआन की नेट वर्थ में 112 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। अब उनकी नेटवर्थ 7.5 बिलियन डॉलर हो गई है।

इसी ऐप के जरिए रक्षामंत्री ने सेना प्रमुखों के साथ की थी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक अप्रैल को जूम ऐप से ही चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ जनरल बिपिन रावत के अलावा आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के चीफ से मीटिंग की थी। ऐसे में हालात बेहद चिंताजनक हो जाते हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी एप्पल के मैकबुक एयर लैपटॉप से इसी ऐप वीडियो कांफ्रेसिंग करते दिखे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की नेशनल सिक्युरिटी एंजेसी के पूर्व हैकर पैट्रिक वार्डले ने बताया है कि इस ऐप को इस्तेमाल करने वाले मैक यूजर्स का वेबकैम और माइक्रोफोन तक हैक किया जा सकता है। 

भारत की प्रमुख पार्टियां करती रही हैं जूम ऐप से मीटिंग
भारतीय नेता जूम ऐप को लेकर सुरक्षा चिंताओं से बेखबर दिखते हैं। भाजपा और कांग्रेस इस ऐप का भरपूर इस्तेमाल करती रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस ऐप के माध्यम से ही अधिकतर कांग्रेस वर्किंग कमेटी को संबोधित कर चुकी हैं। इसके अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह, भूपेश बघेल, आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद भी इसका उपयोग कर रहे हैं। भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन होने के बाद इस ऐप का बहुत तेजी से इस्तेमाल शुरू हुआ।



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