• रिपोर्ट में कहा गया था कि एलएसी के पास चीन ने भारतीय जवानों को बंधक बनाया, भारतीय सेना ने इससे इनकार किया
  • पूर्वी लद्दाख में इसी महीने कई बार भारत-चीन के सैनिक आमने-सामने आए; बातचीत से हालात संभालने की कोशिशें जारी

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 01:22 AM IST

नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास विवादित इलाके में भारत और चीन के जवानों के बीच तनाव कम नहीं हो रहा है। हालांकि, दोनों ही ओर से बातचीत के जरिए हालात को सामान्य करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। पैंगोंग सो और गलवान घाटी के विवादित क्षेत्रों के हालात से वाकिफ सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच अभी भी स्थितियां सामान्य नहीं हुई हैं। दोनों तरफ सैनिक अपनी पोजिशन पर डटे हैं। चीन गलवान में बंकर बनाने के लिए भारी उपकरण ला रहा है।

भारतीय सेना ने रविवार सुबह एक रिपोर्ट को लेकर बयान जारी किया। इसमें कहा गया था कि चीन की सेना ने भारतीय सैनिकों को कुछ दिन बंधक बनाने के बाद छोड़ा। सेना ने कहा- सीमा पर किसी भी भारतीय सैनिक को बंधक नहीं बनाया गया। जब मीडिया इस तरह की अपुष्ट चीजों को पब्लिश करता है तो यह केवल राष्ट्रीय हितों को चोट पहुंचाता है।

गलवान में चीन ने अपनी स्थिति को मजबूत किया
सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि गलवान घाटी में चीन ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है। उसने वहां पर पिछले दो हफ्तों में ही 100 टेंट लगा लिए हैं। चीन की सेना वहां पर बंकर बनाने के लिए भारी उपकरण ला रही है। भारतीय पक्ष ने चीनी सेना के इस कदम पर विरोध दर्ज कराया है।

चीन ने यह कदम तब उठाया जब पिछले हफ्ते दोनों पक्षों के कमांडरों ने हालात सामान्य करने के लिए बैठक की। ऐसा नहीं है कि केवल चीन ही इन इलाकों में अपनी ताकत बढ़ा रहा है। भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपनी ताकत को बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही भारतीय सैनिकों ने डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में निगरानी बढ़ा दी है।

मई में दोनों सेनाओं के बीच तीन बार झड़प हुई

भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस महीने तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी करते हुए कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं। वास्तविकता में यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है।

इस महीने झड़पें कहां, कब और कैसे हुई?

1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।



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