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6 मिनट पहले

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  • अमेरिका के ब्रिघम एंड वीमेंस हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं का दावा
  • कहा- पिछले 2 दशकों में नींद की दवाएं लेने वालों में बढ़ोतरी हुई

नींद न आने की समस्या यानी अनिद्रा से जूझ रहे हैं तो लम्बे समय तक नींद की गोलियां न लें। ये अनिद्रा को दूर करने में फेल साबित होती हैं। यह दावा अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में किया है। रिसर्च के मुताबिक, क्लीनिकल ट्रायल में साबित हुआ है कि नींद की दवाएं अधिकतम 6 माह तक ही अनिद्रा की समस्या दूर करने का काम करती हैं।

रिसर्च करने वाले अमेरिका के ब्रिघम एंड वीमेंस हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं का कहना है, डॉक्टर्स और मरीज दोनों तो लम्बे समय तक ऐसी दवाएं प्रिस्क्राइब करने और लेने से बचने की जरूरत है।

अनिद्रा से परेशान 685 महिलाओं पर हुई रिसर्च
नींद की दवा अनिद्रा के मरीजों पर कितना असरदार है, इसे समझने के लिए 685 महिलाओं पर रिसर्च की गई। इनकी औसतन उम्र 50 साल थी। इन सभी महिलाओं को नींद न आने की समस्या थी। ये नींद टूटने और देररात जल्द नींद खुलने की समस्या से परेशान थीं। इनमें से 238 महिलाओं को नींद की दवाएं दी गईं और 447 को दवाएं नहीं गईं।

एक और दो साल बाद महिलाओं से सवाल-जवाब किए गए। रिजल्ट में सामने आया कि नींद की दवाओं से महिलाओं की अनिद्रा की समस्या पर कोई बड़ा असर नहीं दिखा।

हर तीन में एक रात अनिद्रा की शिकायत रही
रिसर्च की शुरुआत में हर 3 में एक रात महिलाओं को नींद न आने की शिकायत रही। 3 में से 2 रातों को अचानक नींद खुलने की समस्या रही। शोधकर्ता डॉ. डेनियल सोलोमन के मुताबिक, नींद न आने की समस्या कॉमन होती जा रही है। पिछले 2 दशकों में नींद की दवाएं लेने वालों में बढ़ोतरी हुई है।

दवाओं का असर 2 से 12 हफ्तों तक रहता है
शोधकर्ता सोलोमन का कहना है, नींद की दवाओं का असर 2 से 12 हफ्तों तक रहता है, इसके बावजूद मरीज इसे लम्बे समय तक लेते हैं। डॉक्टर्स भी इसे कुछ समय तक ही लेने की सलाह देते हैं लेकिन मरीज बिना एक्सपर्ट की सलाह के इसे लम्बे समय तक लेते रहते हैं।

नींद न आने की वजह को समझें
शोधकर्ताओं का कहना है, नींद न आने पर इसकी वजह को समझने की कोशिश करें। ज्यादातर मामलों इसकी वजह बीमारियां हो सकती हैं। इनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दर्द और डिप्रेशन जैसे रोग शामिल हैं। बेहतर होगा कि अनिद्रा की वजह जानकार उसका इलाज करें।

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