Ranchi Corona News Updates; Rajdhani Express Reached Ranchi railway station From Delhi | अब समझ आया “गांव मेरा मुझे याद आता रहा” गजल का मतलब; ट्रेन से उतरकर धरती चूमी, कहा चार पैसे कम कमाउंगा, पर यही रहूंगा

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Ranchi Corona News Updates; Rajdhani Express Reached Ranchi railway station From Delhi | अब समझ आया “गांव मेरा मुझे याद आता रहा” गजल का मतलब; ट्रेन से उतरकर धरती चूमी, कहा चार पैसे कम कमाउंगा, पर यही रहूंगा


  • गुरुवार को नई दिल्ली से चलकर रांची रेलवे स्टेशन पहुंची राजधानी एक्सप्रेस
  • रांची पहुंचने पर खुश दिखे यात्री, कहा-लॉकडाउन में हुई काफी परेशानी

Ranchi Corona News Updates; Rajdhani Express Reached Ranchi railway station From Delhi | अब समझ आया “गांव मेरा मुझे याद आता रहा” गजल का मतलब; ट्रेन से उतरकर धरती चूमी, कहा चार पैसे कम कमाउंगा, पर यही रहूंगा

गुप्तेश्वर कुमार

May 14, 2020, 06:03 PM IST

रांची. 22 मार्च से ट्रेनें बंद होने के बाद से फंसे लोगों को लेकर राहत की ट्रेन गुरुवार सुबह दस बजे रांची पहुंची। इस ट्रेन से उतरे पलामू के रहने वाले किशन कुमार दिल्ली में सिलाई का काम करते थे, लॉकडाउन लगने के बाद काम खराब हुआ तो घर की याद आई। बचपन से जगजीत सिंह की गजल “चार पैसे कमाने में आया शहर गांव मेरा मुझे याद आता रहा” सुनता था, उसका मतलब लॉकडाउन लगने के बाद समझ में आ गया। अब चाहे चार पैसे कम कमाउंगा लेकिन, अब यही रहूंगा।

राजधानी एक्सप्रेस से रांची पहुंचे यात्री प्राइवेट वाहन के मदद से अपने घर गए।

मौसी से पैसे उधार लेकर टिकट कटाई, पानी पीकर सफर काटा
रांची स्टेशन से बाहर निकलने पर पलामू के रहने वाले मुनव्वर अंसारी ने बताया- “मैं दिल्ली में सिलाई का काम करता था। अचानक लॉकडाउन लगने के बाद दिन-ब-दिन मेरी स्थिति खराब होने लगी। काम बंद हो गया, हाथ में पैसे नहीं बचे। खाना-पीना और किराया देने के भी पैसे नहीं थे। अपनी मौसी से पैसे लेकर ट्रेन का टिकट कटाया। रात में ट्रेन में ही दो बोतल पानी पीकर रांची तक पहुंचा। वापस जाने के बारे में कहा- अभी कुछ नहीं बता सकता कि वापस जाऊंगा या नहीं।

सीएम को ट्वीट करके मांगी मदद, फायदा नहीं हुआ
जमशेदपुर की रहने वाली मनीषा दिल्ली में रहकर पीसीएस की तैयारी कर रही थीं। वह बताती हैं- “दिल्ली में हो रही समस्या और यहां पिता की तबीयत खराब होने की वजह से जल्द-से-जल्द अपने घर जाना चाहती थीं। लेकिन, यह संभव नहीं हो पा रहा था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने से भी ट्वीट के माध्यम से मदद की गुहार लगाई थी, पर कोई फायदा नहीं हुआ। इसी बीच ट्रेन चलने की बात सामने आई और उन्होंने रांची के लिए टिकट ले लिया। अगर हालात ऐसे ही रहे तो दिल्ली नहीं जाऊंगी, यही से पढ़ाई करूंगी।

खाने-पीने की समस्या नहीं होती तो शायद दिल्ली में रुके रहते
पाकुड़ निवासी नसीम अंसारी ने बताया-“मैं दिल्ली में केक बनाने का काम करता था। लॉकडाउन में सब बंद हो गया तो पैसे की कमी हो गई। इसके बाद खाने-पीने तक की समस्या आने लगी। प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए सरकार द्वारा की गई व्यवस्था के तहत उन्होंने झारखंड आने का प्रयास किया पर इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। अब इस ट्रेन के चलने से राहत मिली है। वहां खाने-पीने की व्यवस्था हो गई होती तो शायद लौटने की जल्दी नहीं होती। लॉकडाउन के बाद ही सोचेंगे कि वापस जाना है या नहीं।”



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