• स्कूल खुद को मछली और पेरेंट्स को मछुआरा समझते हैंं क्योंकि स्कूलों काे लगता है कि पेरेंट्स उनकी बैलेंसशीट देखकर उसमें कमियां ढूंढेंगे
  • याचिका में चंडीगढ़ प्रशासन और गृह मंत्रालय को नोटिस हो चुका है और 16 जून तक दोनों पक्षों को हाईकोर्ट में अपना जवाब दायर करना है

दैनिक भास्कर

Jun 11, 2020, 05:48 PM IST

चंडीगढ़. (गौरव भाटिया). शहर के प्राइवेट स्कूलों को डर है कि अगर वह अपनी वेबसाइट पर बैलेंसशीट डाल देंगे तो पेरेंट्स के लिए यह ‘फिशिंग एक्सपीडिशन’ बन जाएगा। इसका मतलब है कि स्कूल खुद को मछली और पेरेंट्स को मछुआरा समझते हैंं क्योंकि स्कूलों काे लगता है कि पेरेंट्स उनकी बैलेंसशीट देखकर उसमें कमियां ढूंढेंगे।

चंडीगढ़ के प्राइवेट स्कूलों की ओर से इंडिपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में फीस रेगुलेरी एक्ट के प्रावधानों को चैलेंज करने के लिए जो याचिका दायर की उसमें यह सब लिखा गया है।याचिका में चंडीगढ़ प्रशासन और गृह मंत्रालय को नोटिस हो चुका है और 16 जून तक दोनों पक्षों को हाईकोर्ट में अपना जवाब दायर करना है।

बैलेंसशीट ऐसे बनेगी फिशिंग एक्सीपिडशन 
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के चंडीगढ़ चैप्टर के पूर्व प्रेसिडेंट बृजभूषण शर्मा ने कहा कि स्कूलों को लगता है कि अगर उन्होंने वेबसाइट पर बैलेंसशीट अपलोड कर दी तो पेरेंट्स को पता लग जाएगा कि स्कूल के पास कितने पैसे पड़े हैं। यही नहीं स्कूलों की वित्तिय अनियमितताएं उजागर हो जाएंगी। जिन को आधार बनाकर पेरेंट्स स्कूलों पर कोर्ट में नए केस डाल सकते हैं या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को शिकायत भी कर सकते हैं। गौरतलब है कि सभी स्कूल चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड है और इनकम टैक्स से छूट मिली हुई है। अगर पेरेंट्स स्कूलों की मुनाफाखोरी की शिकायत इनकम टैक्स डिपाटमेंट से करने लगे तो मछली की तरह आसानी से फंस जाएगा।चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नितिन गोयल ने कहा कि हम इस मामले में एप्लीकेशन लगाकर पेरेंट्स की ओर से पार्टी बनने जा रहे हैं। सभी स्कूल चैरिटेबल ट्रस्ट हैं तो इनके पास ऐसे क्या बिजनेस सीक्रेट हैं जिन्हें छुपाने के लिए यह इतना घबराए हुए हैं। 

कमाई को कहीं भी इस्तेमाल करने की आजादी
फीस रेगुलेटरी एक्ट के तहत स्कूल अपने फंड्स को किसी अन्य स्कूल, ट्रस्ट,संस्था या व्यक्ति को डायवर्ट नहीं कर सकते। इस वजह से इंडिपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में इस प्रावधान को भी चुनौती दी है और यह कहा है कि उन्हें यह छूट होनी चाहिए कि किसी एक स्कूल से की गई कमाई को अन्य स्कूल को खोलने के लिए या किसी भी अन्य सोसाइटी, ट्रस्ट या व्यक्ति को डायवर्ट करने की आजादी होनी चाहिए।

पेनल्टी को हटाने की मांग
याचिका में कहा गया है कि फीस रेगुलेटरी अथॉरिटी के सेक्शन 14 को पूरी तरह से गैरकानूनी व निराधार घोषित किया जाए। खासबात है कि सेक्शन 14 के तहत ही फीस रेगुलेटी कमेटी के पास यह पावर्स हैं कि एक्ट का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर पेनल्टी लगा सके या बार-बार उल्लंघन करने पर उनकी मानयता रद्द कर सके। अगर स्कूलों ने पेरेंट्स से ज्यादा फीस वसूली है तो रिफंड करने की पावर्स भी इसी सेक्शन के तहत आती है।

आईएसए ने अपनी याचिका में यह सवाल भी उठाए

  1. क्या फीस रेगुलेटरी एक्ट की नोटफिकेशन में बैलेंसशीट अपलोड करने का प्रावधान जोड़ना असंवैधानिक है।
  2. पंजाब में जो फीस रेगुलेटरी एक्ट लागू किया गया उसमें बैलेंसशीट अपलोड करने का प्रावधान नहीं है तो फिर केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ में इसे लागू करने से पहले बैलेंसशीट अपलोड करने के प्रावधान जोड़ने की पावर को चुनौती दी है।
  3. यह भी चुनौती दी गई है कि स्कूल के खर्चे पूरे करने के बाद जो पैसा बच जाए तो उसे उसी स्कूल पर विकसीत करने के लिए खर्च किया जा सकता है।



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