• 8 जुलाई 2016 को बुरहान वानी की मौत और जाकिर मूसा के हिजबुल छोड़ने के बाद आतंक का नया पोस्टर ब्वॉय बना था नायकू
  • कश्मीरी युवाओं को बरगलाने में माहिर था नायकू, पुलिसवालों को नौकरी छोड़कर आतंकवाद की राह चुनने का अभियान चलाया था

दैनिक भास्कर

May 07, 2020, 04:02 AM IST

श्रीनगर. 8 साल से घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन की कमान संभाल रहे रियाज नायकू को बुधवार को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। नायकू राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के ऑपरेशन जैकबूट का आखिरी और अहम टारगेट था। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नायकू 12 लाख का इनामी था, मोस्ट वांटेड था और मोस्ट वांटेड लिस्ट में ए ++ कैटेगिरी में शामिल था। 

क्यों पड़ी ऑपरेशन जैकबूट की जरूरत?

आतंकवादियों ने ऐलान कर दिया था कि दक्षिण कश्मीर के चार जिले पुलवामा, कुलगाम, अनंतनाग और शोपियां आजाद हैं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, डोभाल ने इसी दौरान ऑपरेशन जैकबूट की नींव डाली। 

बुरहान वानी आतंकवाद का पोस्टर ब्वॉय बन चुका था। हिजबुल का यह कमांडर अपने साथियों सब्जार भट, वसीम मल्ला, नसीर पंडित, इशफाक हमीद, तारिक पंडित, अफाकुल्लाह, आदिल खानदी, सद्दाम पेद्दार, वसीम शाह और अनीस के साथ आतंकवादी एक्टिविटीज को लगातार अंजाम दे रहा था।

आतंक के ये 11 चेहरे कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में रोज नए चैप्टर जोड़ रहे थे। यह वो दौर था, जब घर में पैदा हो रहा आतंकवाद सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बन गया था। विदेशी आतंकवादी पीछे रह गया था, क्योंकि यही चेहरे घाटी के युवाओं को आतंकवाद की ओर खींचने में कामयाब हो रहे थे।

घर में पनप रहा आतंकवाद घाटी के कई पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को अपनी ओर खींच रहा था। बुरहान का गैंग इन्हें प्रोत्साहित कर रहा था। कई पुलिसवालों को टॉर्चर किया गया, किडनैप किया गया और कई की हत्या कर दी गई ताकि वे एंटी मिलिटेंसी ऑपेरशन में शामिल ना हो सकें।

लोकल इन्फॉर्मर का नेटवर्क बेहद मजबूत था, क्योंकि बुरहान वानी गैंग के सभी 11 मेंबर लोकल थे। पार्टी और गाना-बजाना वो भी बिना पकड़े जाने या जाल में फंसने के डर के, इन आतंकवादियों के बारे में यह बात घाटी में सभी को पता थी। इसी नेटवर्क के दम पर सुरक्षा बलों के जरा से भी मूवमेंट का पता इस आतंकी ग्रुप को लग जाता था।

अजित डोभाल को इस दौर में मुश्किल फैसला लेना था। तब भी लोग जानते थे कि घाटी में डोभाल के ‘आंख और कान’ हैं, जिनके बारे में सुरक्षा बलों के बड़े अधिकारियों को भी मालूमात नहीं होते थे। इंटेलीजेंस सर्किल में इन आंख और कान को डोभाल की खास और अहम पूंजी कहा जाता था और, डोभाल ने इसी दौर में ऑपरेशन जैकबूट शुरू किया।

आतंक के पोस्टर ब्वॉयज का खात्मे के बाद नया पोस्टर ब्वॉय बना नायकू

1972 में समर ओलिंपिक के दौरान म्यूनिख में फिलिस्तीनी आतंकियों ने नरसंहार किया था। इसका बदला लेने के लिए इजरायल ने ऑपरेशन “खुदा का कहर” शुरू किया था। नरसंहार के जिम्मेदार हर आतंकवादी को इजरायल ने चुन-चुनकर मौत के घाट उतारा। अजित डोभाल ने ऑपरेशन जैकबूट को भी कुछ इसी तरह अंजाम दिया। आतंकवाद के पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी और उसके हर साथी की मौत की पटकथा डोभाल ने खुद लिखी। ना केवल बुरहान वानी और उसके साथियों, बल्कि दूसरे लोकल आतंकवादियों को भी इसी ऑपरेशन के तहत सुरक्षा बलों ने मौत के घाट उतार दिया। इस पूरे ग्रुप में तारिक पंडित अभी जिंदा है। उसे 2016 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

बुरहान वानी 8 जुलाई 2016, सब्जार भट मई 2017, वसीम मल्ला अप्रैल 2015, नसीर पंडित अप्रैल 2016, अफाकुल्लाह अक्टूबर 2015, आदिल अक्टूबर 2015 सद्दाम, वसीम और अनीस, मो. रफी भट मई 2018 में मारे गए। मई 2019 में टॉप हिजबुल कमांडर लतीफ टाइगर को ढेर किया गया। बुरहान वानी की उस वायरल तस्वीर में लतीफ नहीं था, जो रातोंरात आतंकवाद के पोस्टर ब्वॉयज के तौर पर वायरल हो गई थी। 

नए पोस्टर ब्वॉय की तलाश हिज्बुल ने शुरू कर दी थी, क्योंकि बुरहान वानी मारा गया था। हिजबुल को एक ऐसे लोकल चेहरे की तलाश थी, जो बुरहान की जगह ले सके। 

रियाज नायकू हिज्बुल के लिए इस जगह के लिए सबसे सही चेहरा था। पढ़ा-लिखा रियाज इलाके में गणितज्ञ के तौर पर मशहूर था। वो एक चित्रकार भी था, जो गुलाब की तस्वीर बनाना काफी पसंद करता था। चश्मा पहना था, जैसा कि कभी-कभी बुरहान वानी भी करता था। जाकिर मूसा जब 2017 में हिजबुल से अलग हुआ तो इस आतंकवादी संगठन को बचाने में नायकू ने अहम रोल निभाया था। मूसा ने अलकायदा से जुड़ा गजवतुल हिंद संगठन बनाया था। मूसा को 23 मई 2019 में त्राल में सुरक्षा बलों ने ढेर किया था।

12 लाख का इनामी रियाज नायकू बुरहान वानी गैंग के सफाए के बाद मोस्ट वांटेड हो चुका था। वानी के खात्मे के 8 महीने के भीतर ही नायकू रैंक में काफी ऊपर आ गया था।

आतंकवादियों के जनाजे में फायरिंग करने वाले रियाज नायकू को प्रोपोगैंडा का मास्टर माना जाता था। उसने अभियान शुरू किया था, जिसके जरिए वो जम्मू-कश्मीर के पुलिसवालों को अपनी जॉब छोड़ने और आतंकवाद की राह चुनने को कहता था। उसने कई ऐसे पुलिसवालों के परिवारवालों को किडनैप करने की साजिश की थी, जिन्होंने अपनी जॉब छोड़ने से इनकार कर दिया था। प्रोपोगैंडा की वजह से उसे ज्यादा खतरनाक माना जाता था।

वह ज्यादा युवाओं को खींचने और आतंकवादी बनाने में कामयाब हो रहा था। लेकिन, 8 साल से बच रहे इस मोस्ट वांटेड को डोभाल के ऑपरेशन जैकबूट ने अपना आखिरी और अहम टारगेट बना ही दिया। ये हाल की मुठभेड़ों में शहीद हुए अफसरों की मौत का बदला भी है और साथ ही सुरक्षा बलों के लिए राहत की खबर भी। 



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here