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झारखंडएक घंटा पहले

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इन पहाड़ियों का अस्तित्व खत्म - Dainik Bhaskar

इन पहाड़ियों का अस्तित्व खत्म

  • पर्वत श्रंखला बनने में करोड़ों वर्ष, खत्म होने में सिर्फ 17 साल
  • गदवा पहाड़ पर शिवलिंग जैसी यह आकृित खनन माफिया की माया है

झारखंड के चार जिले-दुमका, गोड्‌डा, पाकुड़ और साहिबगंज तक में फैली 10 करोड़ वर्ष पुरानी राजमहल पर्वत शृंखला की 12 पहाड़ियां गायब हो गई हैं। ये पहाड़ियां हिमालय से 5 करोड़ वर्ष पहले बनीं, पर इनका वजूद मिटाने में चंद साल ही लगे। गदवा-नासा, अमजाेला, पंगड़ाे, गुरमी, बाेरना, धाेकुटी, बेकचुरी, तेलियागड़ी, बांसकोला, गड़ी, सुंदरपहाड़ी, माेराकुट्टी पहाड़ियाें का अस्तित्व पत्थर माफिया ने अवैध खुदाई कर खत्म कर दिया है।

साहिबगंज के पीजी काॅलेज में भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक डॉ रंजीत प्रसाद सिंह के अनुसार अत्यधिक खनन के कारण गदवा पहाड़ी का वजूद बीते 17 साल में खत्म होने के कगार पर है। हाल में जब झारखंड में अवैध पत्थर खनन की खबरें सुर्खियां बनीं तो भास्कर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा। पता चला नियम-कानून ताक पर रखकर पत्थर माफिया गदवा के बचे हिस्से की दिन-रात खुदाई कर रहे हैं। इसमें उनका साथ दे रहे हैं खनन विभाग, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी और कुछ सफेदपाेश। इस मिलीभगत पर जब भास्कर ने साहिबगंज के डीसी रामनिवास यादव से सवाल पूछे तो उन्होंने उल्टे हमसे ही अवैध उत्खनन के सबूत मांगे। कहा कि यहां आकर प्रमाण दें। हालांकि माना कि जिला टास्क फोर्स लगातार छापेमारी कर रही है और अवैध क्रशर सील किए जा रहे हैं।

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1. लीज रद्द पर सुनवाई के बीच ही दूसरे को आवंटित

बांसकाेला में गदवा माैजा के प्लाॅट 60, 61, 62 के 5.76 एकड़ का लीज जयराम दास को 18.08.1999 से 10 वर्षाें के लिए दिया गया। पर माेतीझरना और औषधीय पाैधाें काे संरक्षित करने के लिए लीज रद्द कर दिया गया। उपायुक्त काेर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इधर सुनवाई चल रही थी, उधर भूखंड पर माेहन एंड संजय स्टाेन वर्क्स का बाेर्ड लग गया। खनन चलता रहा और 2016 में इसे सीटीओ दे दिया गया।

2. पहाड़ जमींदोज, अब जमीन खोदकर पाताल तक जा रहे

राजमहल पर्वत शृंखला पर खनन के लिए 184 लोगों को लीज मिला है। पर, माफिया भी अवैध खनन कर रहे हैं। सीमांकन की जांच नहीं करने से आवंटित क्षेत्र से कई गुना अधिक खनन हो रहा है। यही कारण है कि गदवा पहाड़ी सिर्फ शिवलिंग के रूप में बची है। खनन माफिया ने इस पहाड़ को पहले खोदकर जमीन से मिला दिया और अब जमीन खाेदकर पाताल से मिला रहे हैं। शृंखला की कई अन्य पहाड़ियों की तलहटी में भी लगातार खनन जारी है।

3. माफिया ने 2 चेक डैम भरकर मैदान बना दिया

बड़ी भगियामारी में ग्रामीणों के लिए चेक डैम बना था, पर डैम से 50 मीटर दूर ही खनन पट्टा व क्रशर का लाइसेंस दे दिया गया है। क्रशर के डस्ट से डैम का अस्तित्व ही खत्म हाे गया है। सकरीगली के किरुकुड़िया में भी जमुनी डैम था। अब यह डस्ट का मैदान बन गया है। जबकि संकरीगली स्टेशन, रेलवे लाइन और एनएच-80 के किनारे भी कदम-कदम पर पत्थर के डस्ट की डंपिंग हो रही है।

अरावली के बाद सबसे पुरानी पहाड़ी

  • कार्बन डेटिंग के अनुसार राजमहल शृंखला 10 करोड़, हिमालय 5 करोड़, जबकि अरावली 57 करोड़ वर्ष पुरानी।
  • राजमहल पर्वत शृंखला का निर्माण ज्वालामुखी विस्फोट से हुआ है।
  • यह 26 सौ वर्ग किलोमीटर में फैली है और इसकी सर्वाधिक ऊंचाई 567 मीटर है।

इन पहाड़ियों का अस्तित्व खत्म

गदवा-नासा, अमजाेला, पंगड़ाे, गुरमी, बाेरना, धाेकुटी, बेकचुरी, तेलियागड़ी, बांसकोला, गड़ी, सुंदरपहाड़ी, माेराकुट्टी

एनजीटी ने कहा- कार्रवाई दिखावा

एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की रिपोर्ट में भी राजमहल की पहाड़ियों पर अवैध खनन को लेकर कई गड़बड़ियां उजागर हुई हैं।

निरीक्षण से पहले ही मिल गई सूचना, सील क्रशर में खौलता हुआ पानी मिला

कमेटी ने रिपोर्ट में लिखा है कि बड़ी कोदरजना के एक अवैध क्रशर की जांंच में जिला खनन पदाधिकारी ने बताया कि इसे बंद कर केस किया गया है। पर, हमें क्रशर चलने के सबूत मिले। वहां टंकी का पानी गर्म था और डीजी जेनरेटर को मौके से हटाकर बगल में रखा गया था।

सदस्यों को खदान पहुंचने से पहले ही रोका, ट्रक लगाकर रास्ता ब्लॉक किया

जिला खनन पदाधिकारी ने कमेटी को बताया कि सुंदरा मौजा में कुछ अवैध पत्थर खदानों पर कार्रवाई की गई है। टीम जब वहां पहुंची तो बीच रास्ते में ही एक ट्रक सड़क के बीचोंबीच खड़ा कर रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया। वहां एक-दो लोग मौजूद थे, पर ट्रक ड्राइवर नहीं था।

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