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ग्वालियर8 मिनट पहले

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प्रदेश की 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने ‘बिकाऊ नहीं, टिकाऊ चाहिए, फिर से कमलनाथ सरकार चाहिए’ का नारा दिया है।

  • पूर्व मंत्री और पूर्व विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के चुनाव प्रभारी पीसी शर्मा ने प्रदेशव्यापी चुनाव अभियान की शुरुआत ग्वालियर के कार्यकर्ताओं को मास्क बांटकर की
  • प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा छपवाए गए इन मास्क के ऊपर लिखा है बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए फिर से कमलनाथ सरकार चाहिए

कांग्रेस ने उपचुनाव का शंखनाद ग्वालियर से कर दिया है। प्रदेश की 27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने ‘बिकाऊ नहीं, टिकाऊ चाहिए, फिर से कमलनाथ सरकार चाहिए’ का नारा दिया है। कांग्रेस ने इस नारे के जरिए सीधे सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने वाले विधायकों को निशाने पर लिया है। पूर्व मंत्री और पूर्व विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के चुनाव प्रभारी पीसी शर्मा ने प्रदेशव्यापी चुनाव अभियान की शुरुआत ग्वालियर के कार्यकर्ताओं को मास्क बांटकर की। प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा छपवाए गए इन मास्क के ऊपर लिखा है बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए फिर से कमलनाथ सरकार चाहिए। ये मास्क पूरे प्रदेश में बांटे जाएंगे, खासतौर पर उन सभी विधानसभा क्षेत्रों में जहां उपचुनाव होना है।

कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व मंत्री श्री शर्मा ने बताया कि चुनाव अभियान की शुरुआत ग्वालियर से की गई है। इसी अंचल से सरकार की जोड़तोड़ की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए भाजपा द्वारा की गई एक घटिया हरकत थी, जिसके तहत जनादेश को भी दरकिनार कर दिया गया। ऐस लोगों की करतूतों के कारण ही प्रदेश में कोरोना का प्रकोप बढ़ा और व्यापार-व्यवसाय चौपट हो गए। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिए नारे के साथ ही जनता के बीच जाकर न्याय मांगेंगे। साथ ही लोगों से आग्रह करेंगे कि वे लोकतंत्र को कलंकित करने वालों को सबक सिखाएं।

27 में से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग में

गौरतलब है कि मार्च में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने कांग्रेस छोड़ी थी। इनमें से 16 सीट ग्वालियर-चंबल अंचल में हैं, जिन पर उपचुनाव होना है। इसी कारण कांग्रेस का पूरा जोर इसी इलाके में है। कांग्रेस के तीन अन्य विधायक भी विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर कांग्रेस छोड़ हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं, जबकि दो सीट बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक विधायक के निधन से रिक्त हैं। मध्य प्रदेश की कुल 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा की 27 सीटें रिक्त हैं। राजनीतिक गलियारों में ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस के 8 से 10 विधायक और इस्तीफा दे सकते हैं।

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