• मुंबई से पटना जा रही ट्रेन 6 घंटे देरी से चल रही थी, चार घंटे ट्रेन खंडवा स्टेशन पर खड़ी रही
  • सूरत से बलिया जा रही ट्रेन मेन ट्रैक पर करीब साढ़े तीन घांटे खाड़ी रही, न पानी था न ही खाना

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 06:54 PM IST

खंडवा. खंडवा रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार काे श्रमिकाें का गुस्सा और दर्द दोनों छलक आया। मुंबई, गुजरात सहित दूसरे राज्यों से अपने घर यूपी बिहार जा रहे श्रमिमों को ट्रेन में तो बिठा दिया गया, लेकिन उनके खाने-पीने की व्यवस्था नहीं की गई। भर गरमी में घंटों लेट चल रही ट्रेनों में भूखे-प्यासे सफर कर रहे श्रमिकों का गुस्सा खंडवा रेलवे स्टेशन पर फूट पड़ा। उन्होंने जमकर हंगामा किया और सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

Khandwa News In Hindi : Nitish Kumar | Khandwa Railway Station Update, Shramik Special Trains News; Migrant Workers Raised Slogans Against Bihar CM Nitish Kumar | श्रमिकाें का गुस्सा और दर्द एक साथ छलका, 24 घंटे से भूखे-प्यासे ट्रेन में बैठे श्रमिक बोले – कोरोना से बाद में, इस व्यवस्था से पहले मर जाएंगे
जो भी ट्रेन खंडवा स्टेशन पहुंची, कम से कम तीन से चार घंटे यहीं पर रुकी रही, जबकि यहां कोई व्यवस्था नहीं थी।

मिली जानकारी अनुसार शुक्रवार सुबह 7 बजे पहली श्रमिक ट्रेन खंडवा रेलवे स्टेशन पर पहुंची। मुंबई से पटना जा रही ट्रेन 6 घंटे देरी से चल रही थी। यहां चार घंटे ट्रेन स्टेशन पर खड़ी रही। इस दौरान भूखे-प्यासे मजदूर दो घंटे तक खाना-पानी खोजते रहे, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। इसके बाद उनका गुस्सा फूट पड़ा। इसी प्रकार सूरत से बलिया जा रही ट्रेन मेन ट्रैक पर करीब साढ़े तीन घांटे खाड़ी रही। खंडवा स्टेशन पर पहली बार ऐसा हुआ कि मेन और लूप ट्रैक पर चार से पांच घंटे तक ट्रेनें खड़ी रहीं। स्टेशन पर ट्रेनों के आने का सिलसिला जारी रहा और दाना-पानी के लिए सुबह 7 से शुरू हुआ हंगामा शाम तक चलता रहा।

सूरत से चलकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन 24 घंटे खंडवा पहुंची
सूरत से चलकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन 24 घंटे के सफर के बाद ट्रेन रुक-रुक कर जब खंडवा स्टेशन पहुंची तो श्रमिकों ने व्यवस्थाओं को लेकर जमकर स्टेशन पर जमकर हंगामा किया। श्रमिकों ने नीतीश कुमार के खिलाफ भी नारे लगाए। श्रमिकों का कहना था 24 घंटे से ज्यादा हो गए हैं। इस ट्रेन में न तो खाने की व्यवस्था है और न पानी की। भूख से पूरी ट्रेन की जनता हलाकान हो गई है। सूरत से खंडवा जो महज 9 घंटे का रास्ता है वह सफर 24 घंटे में पूरी हुई। परेशान मजदूरों का कहना है कि ट्रेन कहीं भी आउटर पर तीन-तीन चार-चार घंटे रोक दी जा रही है। आखिर ऐसी व्यवस्था करनी थी तो ऐसे में मजदूरों को भेजना ही नहीं था। लोग कोरोना से बाद में मरेंगे, लेकिन इस व्यवस्था से पहले मर जाएंगे।



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