• पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण ने कलेक्टर मनीष सिंह से बात कर 21 मई को भेजा था अपना प्रस्ताव
  • इंदौर में क्लिनिकल ट्रायल करना चाह रही थी कंपनी, बाबा ने सीएम से भी की थी बात

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 12:22 PM IST

इंदौर. योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि द्वारा कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए तैयार आयुर्वेदिक दवा को इंदौर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों को देने की अनुमति ड्रग ट्रायल विवाद में फंसने के बाद निरस्त कर दी गई है। क्लिनिकल ट्रायल के संबंध में बाबा रामदेव ने सीएम शिवराज सिंह से भी चर्चा की थी। वहीं पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण ने इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह से चर्चा करने के बाद यह प्रस्ताव भेजा था।

कलेक्टर ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि मेडिकल कॉलेज से प्राप्त आवेदन में दवा मरीजों को काढ़े की तरह देने की बात कही गई थी, ट्रायल की कोई अनुमति नहीं दी गई है। कलेक्टर के अनुसार प्रशासन ने दवा के ट्रायल की अनुमति नहीं दी है। आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाइयों के क्लीनिक ट्रायल नहीं होते है। एलोपैथिक के ट्रायल होते है, जिसकी प्रोटोकॉल व प्रक्रिया है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कंपनी का आवेदन और अनुमति निरस्त कर दी गई है। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉक्टर ज्योति बिंदल का कहना है कि पतंजलि के आवेदन में दवाई कोरोना मरीजों को देने और परिणाम की जांच करने की बात कही गई थी इसलिए आवेदन प्रमुख सचिव मप्र शासन को भेज दिया गया।

पतंजलि का दवा- यह आयुर्वेदिक दवा खाकर कई मरीज हो चुके हैं ठीक

पतंजलि के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में जयपुर सहित कुछ अन्य जगह हुए इस आयुर्वेदिक प्रयोग की टेस्ट रिपोर्ट और डेटा के साथ दावा किया गया था कि इसका कोरोना को खत्म करने में व्यापक असर होगा। कंपनी इंदौर में क्लिनिकल ट्रायल करना चाह रही थी। कंपनी द्वारा अश्वगंधा के उपयोग से यह दवाई तैयार की गई है। आचार्य ने दावा किया था कि अब तक कई मरीज इस दवा से ठीक हो चुके हैं। कुछ अभी भी कई जगह इस दवा को ले रहे हैं। । हमने जो दवाई बनाई है, वह पूर्णत आयुर्वेदिक है। हमारे पास पेंशेंट का डाटा भी है, जो दवाई खाकर ठीक हो चुके।



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