• मंदसौर के रहने वाले समाजसेवी नाहरू खान ने महाकालेश्वर मंदिर में दान की सेंसर वाली घंटी
  • इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में भी देंगे, मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में घंटी दान कर चुके हैं

दैनिक भास्कर

Jun 24, 2020, 08:35 PM IST

उज्जैन. काेरोना संक्रमण में पाबंदी के बाद भी अब भक्त अपने आराध्य बाबा महाकाल के समक्ष घंटी बजा सकेंगे। यह हो सका है- समाजसेवी नाहरू खान की बदौलत। उन्होंने महाकाल मंदिर को ऑटोमैटिक घंटी दान की है। अब श्रद्धालु बिना हाथ लगाए घंटी बजा सकेंगे। इतना ही नहीं, नाहरू इंदौर के खजराना मंदिर में भी ऐसी ही घंटी दान करने वाले हैं। अनलॉक के बाद मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं के घंटी नहीं बजा पाने का दर्द महसूस करते हुए नाहरू ने इस प्रकार की घंटी काे बनाया और सबसे पहले पशुपतिनाथ मंदिर में इसे दान किया।

पशुपतिनाथ मंदिर में घंटी की आवाज नहीं सुनी तो नाहरू खान ने इसे बनाने का सोचा।

खान ने ऐसे बनाई घंटी
मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर खुलने के बाद भी घंटी बजाने पर प्रतिबंध रहा। यह देख शहर के समाजसेवी नाहरू खान के मन में दर्द उठा कि मस्जिदों से अजान सुनाई देने लगी, लेकिन मंदिरों से घंटी की मधुर धुन नहीं सुनाई दे रही। विचार आया कि जब आरती के समय मशीनों वाले ढाेल-नगाड़े बन सकते हैं तो सेंसर वाली घंटी भी बनाई जा सकती है। इसके बाद सेंसर वाली मशीन पर काम किया, जिसमें तीन दिन में सफलता मिली। इसके बाद नाहरू ने सेंसर से घंटी बजाने पर काम शुरू किया। 3 दिन की मेहनत के बाद पशुपतिनाथ मंदिर में ऐसा सेंसर लगाया, जिसके नीचे हाथ और चेहरा दिखाने पर घंटी अपने आप बजने लगती है।

बगैर हाथ लगाए ऐसे बजती है मंदिर में घंटी
खान ने बताया कि एक राॅड के बीच में रोलर लगाया है। इसके नीचे की तरफ सेंसर लगा है। इसके नीचे हाथ या चेहरा दिखाने पर यह राॅड के अंदर लगे रोलर को घुमाना शुरू करता है। हमने मंदिर की घंटी इस रोलर से बांध दी है। सेंसर शुरू होते ही रोलर रस्सी खींचता व छोड़ता है। इससे बिना हाथ लगाए घंटी बजने लगती है।



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