दैनिक भास्कर

Jun 11, 2020, 04:17 AM IST

इंदौर. (राहुल दुबे)  हाई कोर्ट ने सराफा के एक जर्जर मकान को लेकर दायर याचिका पर फैसला दिया है कि ऐसा खतरनाक निर्माण जिससे जानमाल का खतरा हो सकता है, व्यापक जनहित हो तो नगर निगम को यह अधिकार है कि वह तोड़ सकता है।

जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। निगम ने 30 मई को 42, 43 सराफा स्थित जर्जर मकान को तोड़ने से पहले दुकानदारों को दुकान खाली करने नोटिस जारी किए थे। नागेश्वर आभूषण भंडार के मालिक अनिल ने अधिवक्ता विशाल बाहेती के जरिए याचिका में उल्लेख किया था कि पिता ने 1972 में दुकान किराए पर ली थी। दुकानदार ने बिल्डिंग के संबंध में निजी रिपोर्ट तैयार करवाई जिसमें बिल्डिंग को अच्छी होना बताया।

निगम : बिल्डिंग 75 साल पुरानी, कभी भी गिर सकती है, तोड़ना जरूरी
निगम की ओर अधिवक्ता ऋषि तिवारी ने जवाब में उल्लेख किया कि बिल्डिंग को 75 साल पुरानी है। दूसरी और तीसरी मंजिल पहले क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सामने का हिस्सा भी गिर चुका है। बाकी हिस्सा किसी भी समय गिर सकता है। सराफा में काफी लोगों का आना-जाना होता है। खतरा हो सकता है। 11 मई को ही निगम कंट्रोल रूम में सूचना आई थी कि इस बिल्डिंग का कुछ हिस्सा गिर चुका है। हालत देख गिराने का फैसला लिया। मौजूदा स्थिति के फोटो भी पेश किए। 

निगमायुक्त सराफा बाजार पहुंचीं
निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने बुधवार को सराफा और सीतलामाता क्षेत्र के जर्जर मकानों का दौरा किया। बड़ा सराफा स्थित राजकुमार का मकान और 83/5 शीतलामाता बाजार में राधाबाई पति मोतीलाल शर्मा का मकान देखा। दोनों ही जर्जर हैं। इनमें एक मकान में लोग रह रहे हैं। उसे पहले खाली कराया जाएगा।

खतरनाक मकान खाली करें लोग
इंदौर।खतरनाक मकान की आड़ में किराएदार से मकान खाली करवाने की मकान मालिकों की मिलीभगत को लेकर निगमायुक्त ने कहा आपसी विवाद से निगम का लेना-देना नहीं है। लेकिन यह तय है कि किसी खतरनाक मकान से आसपास के लोगों के जीवन पर संकट आ सकता है तो उसे जरूर तोड़ा जाएगा।



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