• स्टूडेंट्स से फीस वसूली के मामले में हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों को हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
  • पंजाब की तरह 70 प्रतिशत फीस वसूली की अनुमति के लिए दाखिल की थी याचिका

दैनिक भास्कर

Jun 23, 2020, 07:25 AM IST

चंडीगढ़. (ललित कुमार) हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूलने से संबंधित एक याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि तीन महीने की फीस नहीं मिल पाने से अगर वाकई में स्कूल चला पाने में दिक्कत हो रही है तो ऐसे स्कूलों को बंद कर देना चाहिए।

स्कूलों की तरफ से अभिभावकों का पक्ष न सुने जाने की मांग पर भी कोर्ट ने कहा कि जो इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे उनको क्यों न सुना जाए। कोर्ट ने मामले पर 7 सितंबर के लिए अगली सुनवाई तय की है। वहीं स्कूलों की तरफ से कहा गया कि पंजाब के प्राइवेट स्कूलों के मामले में हाईकोर्ट ने 70 % फीस वसूले जाने के अंतरिम आदेश दिए थे। हरियाणा के स्कूलों के लिए भी ऐसे ही आदेश दिए जाएं। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि अभिभावक प्रभावित पक्ष हैं। 
उन्हें सुने बिना कोई अंतरिम निर्देश नहीं दिए जा सकते। इस पर स्कूलों की तरफ से कहा गया कि यह अर्जेंट लिटिगेशन है। ऐसे में जल्दी और तत्काल सुनवाई की जाए। कोर्ट ने इस पर कहा कि यह अर्जेंट नहीं लग्जरी लिटिगेशन है।
स्कूल नहीं दे रहे बैलेंस शीट
स्वयं सेवी संस्था स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार की तरफ से कहा गया कि बच्चों की तरफ से उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया जाए। प्रत्येक प्राइवेट स्कूल को हर साल ऑडिट बैलेंस शीट शिक्षा निदेशालय में जमा करानी होती है। इस बारे में संगठन की तरफ से शिकायत पर शिक्षा विभाग ने स्कूलों को 31 दिसंबर तक रिपोर्ट देने को कहा था लेकिन स्कूलों ने यह जानकारी नहीं दी।

87 प्राइवेट स्कूलों की संस्था ने दायर की है याचिका

हरियाणा के लगभग 87 प्राइवेट स्कूलों की संस्था सर्व विद्यालय संघ की तरफ से याचिका दायर कर कहा गया कि 12 अप्रैल से आठ मई तक शिक्षा विभाग के जारी अलग अलग निर्देशों को खारिज किया जाए। इनके आधार पर उन्हें हिसार के डीसी ने 14 मई को पत्र लिख कहा कि हरियाणा एजुकेशन रूल्स, 2003 के मुताबिक बढ़ी हुई फीस और दूसरे फंड स्टूडेंट्स से न वसूले जाएं।

याचिका में कहा गया कि प्राइवेट स्कूलों को फीस को लेकर दिशा निर्देश जारी नहीं किए जा सकते। स्कूल यदि फीस नहीं वसूलेंगे तो वे आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। अप्रैल माह से स्टूडेंट्स फीस का भुगतान नहीं कर रहे हैं। ऐसे में स्कूल के खर्चे निकालना मुश्किल होता जा रहा है।



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