Jul 09, 2019, 03:59 PM IST

हेल्थ डेस्क. चीज केक पश्चिमी देशों की काफी लोकप्रिय डिश है। इसका ईजाद प्राचीन यूनान में हुआ था। बाद में यूनानियों की रोमन साम्राज्य के हाथों पराजय के बाद चीज़ केक की रेसिपी रोमन्स के हाथ लग गई। रोमन्स ने इसमें कुछ नए प्रयोग किए। प्राचीन रोमन साम्राज्य में घर-घर पर ‘प्लेसेंटा’ नामक केक बनाया जाता था जिसमें चीज़ और शहद का भरपूर इस्तेमाल किया जाता था। 

मान्यता है भगवान जगन्नाथ को था प्रिय

  1. रोमन्स से चीज़ केक अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में पहुंचा और धीरे- धीरे वहां की प्रमुख स्वीट डिश बन गया। अब आते हैं चीज़ केक के भारतीय संस्करण पर। यह है ओडिशा का छेना पोडा। इस छेना पोडा केक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी तरह के बेस की जरूरत नहीं होती, जैसी कि अन्य केक में पड़ती है। इसमें यूज किया जाने वाला छेना ही बेस का काम करता है। इसमें अंडे का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता और न ही बेकिंग सोडे की जरूरत पड़ती है। इसमें छेना के अलावा जरूरत होती है शक्कर, रवे और थोड़े-से घी की। इसमें अगर चाहें तो बादाम, काजू, किशमिश जैसे ड्राय फ्रूट्स भी मिलाए जा सकते हैं। इतने ही इंग्रेडिएंट्स के साथ बन जाता है छेना केक। 

  2. माना जाता है कि यह भगवान जगन्नाथ को भी काफी प्रिय था। दुर्गा पूजा और दिवाली के समय यह खासतौर पर बनाया ही जाता है। छेना और सूजी के साथ शक्कर को मिलाकर इसे तब तक कुक किया जाता है, जब तक कि पूरा छेना जलकर रेड ब्राउन न हो जाए। पारंपरिक तौर पर इसे बनाने के लिए छेने और इसके मिक्सचर को केक का आकार देकर साल के पत्तों में अच्छी तरह से लपेट दिया जाता है। फिर इसे लकड़ी या कोयले की भट्टी में दो से तीन घंटे तक पकाया जाता है। इतने इंतजार के बाद सामने आती है लाजवाब स्वाद की अनूठी स्वीट डिश।

  3. आजकल भट्टी और कोयला-लकड़ी का तो जमाना रहा नहीं। इसलिए इसे घरों में लोग सामान्य ओवन या प्रेशर कुकर में ही बना लेते हैं। छेना केक को ईजाद करने का श्रेय ओडिशा के नयागढ़ स्थित एक कन्फेक्शनरी स्टोर के मालिक सुदर्शन साहू को जाता है। हालांकि इसका ईजाद बस संयोगवश ही हुआ था। बात 1947 की है। सुदर्शन साहू का नयागढ़ के दसपल्ला इलाके में एक होटल था। एक दिन उनकी होटल में छेना बच गया। तो उन्होंने यह सोचकर उसमें शक्कर मिला दी कि इससे वह खराब नहीं होगा। इसे उन्होंने एक ओवन में रख दिया जो थोड़ी देर पहले ही इस्तेमाल किए जाने के कारण काफी गर्म था। अगले दिन जब उन्होंने ओवन को खोलकर देखा तो वह रखा हुआ छेना जले हुए केक में बदल गया था। उन्होंने इसी को नाम दिया ‘छेना पोडा।’ 

  4. उड़िया भाषा में छेना पोडा का अर्थ होता है जला हुआ चीज़। आज यह डिश ओडिशा में कई जगहों पर मिल जाएगी, खासकर कटक और भुवनेश्वर हाईवे पर स्थित स्वीट स्टॉल्स पर। हालांकि भारत के अन्य हिस्सों यहां तक कि बड़े रेस्टॉरेंट में भी यह काफी मुश्किल से उपलब्ध हो पाती है। इसलिए अगर आपको ओडिशा जाने का अवसर मिले तो वहां की इस खास मिठाई का स्वाद लेना नहीं भूलें।



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