Aug 09, 2019, 12:14 PM IST

मच्छरों से काटने पर मलेरिया जैसे घातक बीमार हो जाती है जिसका कारण एक संक्रमित एनोफिलीज मच्छर है। अधिकांश तौर पर इन संक्रमित मच्छरों में प्लास्मोडियम पैरासाइट होता है, जो काटने के बाद शरीर पर ही नहीं बल्कि खून में भी पहुँच जाता है। ये संक्रमण कुछ दिनों बाद ही लाल रक्त कोशिकाओं पर बुरा प्रभाव डालने लगता है। 2-3दिन के अंदर ही ये लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर के परजीवी कई गुना बढ़ जाते हैं, जिससे संक्रमित कोशिकाएं फट जाती हैं। 

आइए जानें मलेरिया किन चार तरह के पैरासाइट से फैलता है –

प्लासमोडियम फेल्किपेरम – अगर मलेरिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा पैरासाइट की बात की जाए तो प्लासमोडियम फेल्किपेरम उनमें से एक है। इस पैरासाइट के संक्रामण से होने मलेरिया में उल्टी, बुखार, पीठ दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, चक्कर, बॉडी पेन, थकान लगना और पेट दर्द जैसे लक्षण पाए जाते हैं।

प्लासमोडियम ओवाले – यह पैरासाइट ज्यादातर पश्चिमी अफ्रीका में पाया जाता है और यह इंसान को काटने के बाद काफी लंबे समय तक उसके शरीर में ज़िंदा बना रहता है। इसी कारण से इसका खतरा लंबे समय तक रहता है। 

प्लासमोडियम – इस पैरासाइट के संक्रमण से पीड़ित मरीज में ठिठुरन के साथ तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि यह जानलेवा नहीं होता लेकिन फिर भी इससे बचाव जरूरी है।

प्लासमोडियम वाइवेक्स – इसपैरासाइट के कारण शरीर में बुखार, जुकाम, थकान और डायरिया जैसी मुश्किलें सामने आती हैं। 60 प्रतिशत मलेरिया के भारतीय मामले प्लासमोडियम वाइवेक्स की वजह से ही सामने आते हैं। 
 



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