• फ्रैक्चर या इंजरी होने पर सबसे पहले रेस्ट करना और बर्फ की सिकाई जरूरी 
  • सूजन होना, वजन न उठा पाना और चलने-फिरने में दिक्कत फ्रैक्चर के प्रमुख लक्षण

Jul 01, 2019, 08:07 PM IST

हेल्थ डेस्क. भारत के ऑलराउंडर विजय शंकर चोट के चलते वर्ल्ड कप से बाहर हो गए हैं। उनके बाएं पैर की एड़ी में नॉन डिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर हुआ है। विजय को यह चोट प्रैक्टिस सेशन के दौरान लगी थी। इससे पहले 9 जून को शिखर धवन भी अंगूठे में फ्रैक्चर के कारण वर्ल्ड कप से बाहर हो गए थे। चोट के मामले क्यों आ रहे हैं और इसका कितना असर उनके करियर पर पड़ेगा…ऐसे तमाम सवालों का जवाब जानने के लिए भास्कर ने बात की जयपुर के ऑर्थो सर्जन और स्पोर्ट्स इंजरी एक्सपर्ट डॉ. रजत जांगिड से। 
 

नॉन डिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर को हेयरलाइन फ्रैक्चर भी कहते हैं

  1. क्या है नॉन डिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर ?

    जवाब: यह एक तरह का माइनर फ्रैक्चर है। ऐसी स्थिति में हड्डी के बीच दरार आ जाती है जिसके कारण दर्द महसूस होता है। दरार बारीक होती है और दोनों हिस्से अलग नहीं होते हैं। कुछ समय पहले शिखर धवन को भी अंगूठे में ऐसा ही फ्रैक्चर हुआ था। जो माइनर था, इसे हेयरलाइन फ्रेक्चर भी कहते हैं। जबकि डिस्पलेस्ड फ्रैक्चर में हड्डी दो हिस्सों में बंट जाती हैं और अपनी जगह से खिसक जाती है। 
     

  2. नॉन डिस्प्लेस्ड और हेयर लाइन फ्रैक्चर की वजह क्या है?

    जवाब: दोनों ही एक जैसे फ्रैक्चर है। फ्रैक्चर की मुख्य वजह यह होती है कि चोट के समय प्रभावित हिस्से पर दबाव कितना पड़ा है। बॉल लगने की स्पीड, गिरते समय शरीर के किस हिस्से पर अधिक दबाव पड़ा… ऐसे तमाम कारण होते हैं फ्रैक्चर या इंजरी होने के। कई बार शरीर तैयार न होने पर अचानक किसी हिस्से पर दबाव बनाने पर भी ऐसा हो सकता है। 
     

  3. ऐसे फ्रैक्चर या इंजरी करियर को कितना प्रभावित करते हैं और किन बातों का ध्यान रखें ? 

    जवाब: ऐसी चोटें करियर पर बहुत असर नहीं डालती हैं। लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना गंभीर फ्रैक्चर का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में चोट वाले हिस्से को आराम देना जरूरी है ताकि डैमेज हुआ हिस्सा रिपेयर हो सके। 

  4. इंजरी या फ्रेक्चर हुआ है ये कैसे पहचानें?

    जवाब: शरीर के अंदरूनी हिस्से में दर्द रहना और उसका आसानी से काम न करना प्रमुख लक्षण हैं। जैसे घुटने में इंजरी या फ्रैक्चर होने पर चढ़ने-उतरने में दिक्कत होना। इसके अलावा सूजन और वजन न उठा पाना जैसे लक्षण खासतौर पर दिखते हैं। चोट गंभीर होने पर प्रभावित हिस्से में डिफॉर्मेटी हो जाती है। यानी प्रभावित हिस्सा बाहर से दिखने पर अलग या उभरा हुआ दिखता है। 

  5. ऐसे मामलों में सबसे पहले क्या करें?

    जवाब: चोट या इंजरी के मामलों में हमेशा PRICE थैरेपी से इलाज किया जाता है। PRICE का मतलब है प्रोटेक्शन, रेस्ट, आइस, कंप्रेशन और एलिवेशन। चोट पता चलने या दर्द महसूस होने पर सबसे पहले रेस्ट के लिए बेड पर लिटाएं और अधिक मूवमेंट करने से रोकें। फिर प्रभावित हिस्से पर बर्फ से सिकाई करें। इसके बाद उस हिस्से पर बैंडेज लगाकर कंप्रेशन दें। एलिवेशन के तहत चोट के नीचे तकिया लगाकार चोट वाले हिस्से को हृदय के लेवल से ऊपर रखते हैं ताकि सूजन को कम किया जा सके। दर्द ज्यादा होने पर पेन किलर दी जाती हैं।

  6. कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

    जवाब: फ्रैक्चर या इंजरी के मामलों में समस्या और न बढ़े, इसके लिए HARM फॉर्मूला अपनाया जाता है। H यानी प्रभावित हिस्से पर गर्म सिकाई नहीं करनी है। A – अल्कोहल नहीं लेना चाहिए। R- रनिंग से बचना चाहिए। M यानी मसाज बिल्कुल न कराएं। 



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