• सुबह सोकर उठे बालक और बाइक लेकर पहले पेट्रोल भरवाई, फिर न्यू बायपास तिराहा पर बाइक चलाने लगे
  • मंत्री को बुलाने पर अड़े परिजन, समझाने पर नहीं माने तो लोगों को पुलिस ने जबरन थाने भेजा, तब खत्म हुआ प्रदर्शन

दैनिक भास्कर

Jun 04, 2020, 06:09 AM IST

दतिया. सेंवढ़ा रोड के न्यू बायपास तिराहा पर आलू से भरे ट्रक ने बुधवार की सुबह 7 बजे बाइक सवार तीन बालकों को रौंद दिया। हादसे में एक बालक की माैके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे बालक ने ग्वालियर में दम तोड़ दिया। तीसरे बालक की स्थिति नाजुक बताई जा रही है। तीनों बालक एक ही परिवार के हैं और हादसे के वक्त हाईवे पर बाइक चलाना सीख रहे थे। हादसे के बाद आक्रोशित परिजन ने साढ़े तीन घंटे तक बायपास, दतिया और सेंवढ़ा रोड ट्रैफिक जाम रखा। गुस्साए लोगों ने ट्रक और जेसीबी में तोड़फोड़ कर दी। पुलिस के साथ झूमाझटकी की और पथराव किया।

सेंवढ़ा चुंगी पर रहने वाला करण (14) पुत्र हरगाोविंद अहिरवार बुधवार को सुबह 7 बजे सोकर उठा और मुंह धोकर चचेरे भाई अभिषेक (14) पुत्र चतुर सिंह और शिवम (13) पुत्र श्रीकांत माते के साथ अपने पिता की बाइक क्रमांक यूपी 93 एन 2761 को उठाकर सेंवढ़ा रोड पर नपा के ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास स्थित पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवाने पहुंच गया। पेट्रोल भरवाने के बाद तीनों बालक दतिया-सेंवढ़ा स्टेट हाईवे पर बाइक चलाना सीखने लगे। कुछ देर बाद सेंवढ़ा की तरफ से आ रहे आलुओं से भरा ट्रक क्रमांक एमपी 16 एच 1338 न्यू बायपास से मुड़ा तो बाइक सवार तीनों बालक ट्रक की चपेट में आ गए। 16 चक्का ट्रक बाइक चला रहे करण के सिर के ऊपर से निकल गया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बाइक पर पीछे बैठे शिवम के दांये पैर से पहिया निकल गया जिससे उसका पैर कट गया और बुरी तरह घायल हो गया। बाइक पर पीछे बैठे अभिषेक को अंदरूनी चोटें आई हैं। 

दोनों घायलों को 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां से दोनों को ग्वालियर रैफर कर दिया गया। ग्वालियर में शिवम ने भी दम तोड़ दिया। वहीं अभिषेक की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

तीनों बच्चों के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल
तीनों ही बालकों के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। मूलत: ललउआ गांव के रहने वाले बालकों के पिता हरगोविंद, चतुर सिंह और श्रीकांत माते सेंवढ़ा चुंगी पर निवास करते हैं। करण के पिता हरगोविंद और अभिषेक के पिता चतुर सिंह मकान बनाने की कारीगरी का काम करते हैं। शिवम के पिता श्रीकांत माते हाथ ठेला पर फल बेचते हैं। मृतक करण दो बहनों में इकलौता भाई था। हादसे के बाद बालकों के परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।

साढ़े तीन घंटे तक बायपास, दतिया और सेंवढ़ा रोड पर ट्रैफिक जाम
आक्रोशित परिजन ने सेंवढ़ा, दतिया और बायपास रोड की तरफ जाने वाला सड़क मार्ग झाड़ झक्कड़ व पत्थर रखकर बंद कर दिया। जो लोग जबरदस्ती निकल रहे थे, उन्हें प्रदर्शन कर रहे लोग खदेड़ रहे थे। इसी बीच सेंवढ़ा से रैफर किए गए एक घंटे के नवजात बच्चे को प्रसूता विनीता प्रजापति के साथ 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन इस एंबुलेंस को भी लौटा दिया गया। एंबुलेंस कच्चे रास्ते से 15 मिनट में निकल पाई।

इस दौरान पुलिस ने ट्रक के नीचे फंसा बालक का शव निकालने के लिए जेसीबी बुलवा ली तो प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पेट्रोल डालकर ट्रक जलाने का प्रयास किया। ट्रक की डीजल टंकी फोड़ दी और टायर भी पंचर कर दिए। आगे के शीशे तोड़ दिए। जेसीबी में भी तोड़फोड़ की। पुलिस ने फायर ब्रिगेड बुलाई लेकिन उसे भी पास नहीं आने दिया गया। करीब तीन घंटे बाद सभी थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचा और जो लोग प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे थे, पुलिस ने उन्हें ही उठाकर थाने भिजवा दिया, तब जाम खुल सका।

तीन घंटे तक नहीं उठाने दिया शव…
हादसे के बाद करण का क्षत विक्षत शव सुबह 7 से 10.30 बजे तक ट्रक के पहियों के बीच ही पड़ा रहा। परिजन ने पुलिस को शव नहीं उठाने दिया। परिजन का कहना था कि हमारा बेटा तो मर ही गया है। अब जब तक मंत्री जी (डॉ. नरोत्तम मिश्रा) नहीं आ जाते, तब तक शव नहीं उठाने देंगे। चाहे कितने ही दिन क्यों न हो जाएं। सुबह 8.30 बजे एसडीओपी गीता भारद्वाज मौके पर पहुंची और उन्होंने परिजन को समझाया। सुबह 9 बजे एसडीएम अशोक सिंह चौहान भी पहुंच गए और उन्होंने भी समझाया लेकिन परिजन नहीं माने। एसडीएम बार-बार समझाते रहे कि जो भी कार्रवाई होगी, वे करने को तैयार हैं, लेकिन शव उठाने दो, लेकिन परिजन तैयार नहीं हुए। अंत में अपर कलेक्टर विवेक रघुवंशी और एएसपी आर डी प्रजापति मौके पर पहुंचे और परिजन को समझाया तब वे माने। 



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