दैनिक भास्कर

Apr 13, 2020, 05:57 AM IST

नई दिल्ली. (पवन कुमार) कोरोनावायरस का खतरा कब तक देश में रहेगा, कितने लोगों को जद में लेगा, आगे यह अपनी प्रकृति में बदलाव करेगा या हमारे अंदर इस वायरस को झेलने की शक्ति पैदा हो जाएगी, कैसे भविष्य में इस पर काबू पाया जा सकता है। इन तमाम सवालों पर हमने दो विशेषज्ञों डॉ. चंद्रकांत एस. पांडव और डॉ. नरेंद्र अरोड़ा से विशेष बातचीत की। डॉ. पांडव ने दिल्ली एम्स में 40 साल और डॉ. अरोड़ा ने 35 साल काम किया है।

सवाल- देश में कब तक कोरोनावायरस का खतरा रहेगा। कितने लोग इससे प्रभावित हो सकते हैं?
जवाब- यह वायरस लंबे समय तक साथ रहेगा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया तो इसके संक्रमण से हम लंबे समय तक बच सकते हैं। ऐसा न किया तो भविष्य में देश की 70 से 80% आबादी इस वायरस की चपेट में आ सकती है। 

सवाल- 70 से 80% आबादी इस वायरस के चपेट में आई तो बाकी लोगों में क्या हर्ड इम्युनिटी विकसित हाेगी?
जवाब- हां, बड़ी आबादी वायरस से प्रभावित होने के कारण बाकी 20% लोगों में कोरोना से लड़ने की क्षमता यानी हर्ड इम्युनिटी पैदा हो जाएगी, लेकिन बड़ी आबादी एक साथ संक्रमित हुई तो हम उन्हें नहीं संभाल पाएंगे। सिर्फ रोकथाम से ही खतरा कम कर सकते हैं।

सवाल-कब तक सोशल डिस्टेंसिंग रखी जा सकती है। इतने बड़े देश में ऐसा करना कब तक संभव है?
जवाब- सोशल डिस्टेंसिंग से अच्छा विकल्प फिलहाल नहीं है। यह समय एक से डेढ़ साल हो सकता है। वैज्ञानिक कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन और दवा पर काम रहे हैं। जब तक ये नहीं बनती है, तब तक सोशल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई ही सबसे अच्छी दवा और वैक्सीन होगी। हालांकि, जान बचाने के लिए लोगों को बुनियादी चीजें उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए देश को इमरजेंसी कॉरिडोर बनाना चाहिए। 

सवाल- क्या भारत में जांच कम हो रही है?
जवाब- शुरुआती दौर से ही ज्यादा जांच होनी चाहिए थी। जांच का दायरा अब और बढ़ाना चाहिए, क्योंकि अब तो ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखे थे। अलग-अलग राज्यों के जिलों में रैंडम सैंपलिंग करके जांच होनी चाहिए। इससे निष्कर्ष निकलेगा कि वायरस कहां और किस रूप में फैला हुआ है। इससे आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। राजस्थान का भीलवाड़ा मॉडल इसका उदाहरण है।



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