• आईसीएमआर व आयुष मंत्रालय से इलाज की अनुमति मिलने के बाद 44 मरीजों पर शुरू किया था क्लीनिकल ट्रायल
  • मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने आयुष मंत्रालय को पत्र लिखकर और मरीजों के इलाज किए जाने की मांग की

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 06:51 PM IST

आगरा. आयुष मंत्रालय व इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से कोविड-19 के मरीजों के इलाज की अनुमति मिलने के बाद कुबेरपुर स्थित नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज ने 44 संक्रमितों का सफल उपचार किया है। कोरोनावायरस पर होम्यौपैथी दवाओं का चमत्कारिक असर देखने को मिला है। अमूमन एक संक्रमित के क्लीनिकल ट्रायल में एथोपैथिक दवाओं से ठीक होने में 14 दिन लगते हैं। लेकिन होम्योपैथिक दवाओं से महज पांच से सात दिनों में पॉजिटिव केस निगेटिव हो गए। दावे पर विवाद से बचने के लिए मेडिकल कॉलेज ने रोगियों का दो बार कोरोना टेस्ट कराया, दोनों बार रिपोर्ट निगेटिव आई। 

44 मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल पूरा किया

वैश्विक महामारी कोरोनावायरस से बचाव व निवारण के लिए देश व प्रदेश की सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसके बचाव, उपचार के लिए नए अन्वेषणों की बात करते आए हैं। शायद यही वजह है कि, आगरा स्थित नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को आयुष मंत्रालय व आईसीएमआर ने संक्रमितों के इलाज की अनुमति दी थी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि, फिरोजाबाद के टूंडला स्थित एफएच अस्पताल में भर्ती 44 मरीजों पर पहले चरण अपना क्लीनिकल ट्रायल पूरा किया गया है। इसकी शुरुआत पांच अप्रैल को हुई थी। 

ब्रायनिया एल्वा कोरोना पर असरदार

महज पांच दिनों बाद 10 मई तक मरीजों में कोरोना के लक्षण खत्म हो गए। 12 व 13 मई को टेस्ट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट 15 मई को मिली। सभी मरीज निगेटिव पाए गए। इसके बाद दो अन्य मरीज भी दिए गए, वे भी ठीक हो चुके हैं। डॉक्टर गुप्ता ने कहा- ब्रायनिया एल्वा-200 व आर्सेनिक की दवाएं कारगर रही हैं। जिसमें ब्रायनिया सबसे प्रभावी है। ट्रायल के सफल होने के बाद उन्होंने भारत के अन्य राज्यों में जहां कोरोना के अधिक मरीज हैं, वहां काम करने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि, मेडिकल कॉलेज ने यह सबकुछ अपने खर्चे पर किया है। 



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