• नगरीय निकाय चुनाव में 21 दिसंबर को मतदान के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी से हुआ था विवाद
  • वोटिंग बूथ पर बाहर जाने को लेकर हुई थी धक्का-मुक्की, चांपा थाने में दर्ज कराया था मामला

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 11:26 PM IST

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के जांजगीर में नगरीय निकाय चुनाव में 21 दिसंबर 2019 को वार्ड नंबर 10 में मतदान के दिन वोटिंग और बूथ से बाहर जाने को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी से विवाद हो गया था। इस मामले में चांपा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। राजनीतिक लड़ाई को सांप्रदायिक रंग देते हुए धारा 295 ए भी जोड़ी गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को हाईकोर्ट ने इसमें से सांप्रदायिक विवाद की धारा निरस्त कर दी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच में हुई।

जांजगीर के रहने वाले खालिद मेमन ने अपने अधिवक्ता समीर सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया कि वे जांजगीर चांपा के रहने वाले हैं। नगरीय निकाय चुनाव में वोटिंग के दिन अपने पिता इब्राहिम मेमन के साथ वार्ड क्रमांक 10 के वोटिंग बूथ पर थे। राजनैतिक व्यक्ति होने के कारण वहां चुनाव संपन्न करवा रहे थे। इस वार्ड से कांग्रेस का टिकट गोविंद देवांगन को मिला था। वोटिंग बूथ पर शाम 4 बजे बाहर जाने को लेकर विवाद हो गया। इस पर कांग्रेस प्रत्याशी व समर्थकों की पिटाई कर दी गई। 

घटना के बाद सांप्रदायिक व धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाते हुए गोविंद देवांगन ने चांपा थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इसमें इब्राहिम व खालिद के खिलाफ धारा 294, 506, 323, 295ए, 34, 25 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए दर्ज की गई 295 ए को खालिद मेमन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। साथ ही बताया कि यह मामला सामान्य मारपीट का था, जिसे राजनीतिक होने के कारण सांप्रदायिक झगड़े का रूप दिया गया। 



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