• करीब 12 बजे रवाना हुई ट्रेन, घर भेजने की मांग को लेकर प्रवासी 3 बार कर चुके थे रोड जाम

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 05:42 AM IST

यमुनानगर. प्रवासी श्रमिकों के ठहराव काे लेकर जिले के अधिकारियों की दिक्कत रविवार को रेलवे ने खत्म कर दी। रेलवे ने प्रवासियों को यमुनानगर से बिहार भेजने के लिए यमुनानगर में ही 3 स्पेशल ट्रेनें भेज दीं। प्रशासन को डर था कि कहीं यहां प्रवासियों की भीड़ न पहुंच जाए। इसलिए अधिकारियों ने चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की हुई थी। सुबह ही प्रवासियों से खचाखच भरे रिलीफ कैंप खाली होने शुरू हो गए। रिलीफ कैंपों में रोडवेज की बसें प्रवासियों को लेने पहुंचीं। उन्हें वहां से रेलवे स्टेशन लाया गया। यहां पर उन्हें ट्रेन की टिकट देकर ट्रेन में बैठाया गया। रविवार को बरौनी, मुजफ्फरपुर व कटिहार के लिए 3 ट्रेन रवाना हुईं।

पहली ट्रेन वैसे तो सुबह 10 बजे चलनी थी, लेकिन प्रवासियों को टिकट देने और उन्हें एक-एक कर ट्रेन में बैठाने में काफी समय लग गया। इससे ट्रेन दोपहर 12 बजे रवाना हुई। जिसमें 1569 प्रवासियों को भेजा गया। हालांकि इस ट्रेन के लिए 1585 टिकटें काटी गई थीं। 16 लोग नहीं पहुंचे। इसी तरह दूसरी ट्रेन शाम साढ़े चार बजे रवाना हुई जिसमें 1569 प्रवासियों को रवाना किया गया।

इस ट्रेन की भी 16 टिकटें बच गईं। शाम 6 बजे भी ट्रेन को रवाना किया गया। जिसमें करीब 1600 लोगों को रवाना किया गया है। अाज करीब 4700 प्रवासी यहां से गए। 
इस दाैरान माैके पर शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर, विधायक घनश्यामदास अरोड़ा, डीसी मुकुल कुमार, एसपी हिमांशु गर्ग व एसडीएम दर्शन कुमार समेत अन्य अधिकारी पहुंचे थे। इससे पहले प्रशासन को बिहार के प्रवासियों को ट्रेन से भेजने के लिए हिसार, रोहतक या फिर अम्बाला भेजना पड़ रहा था। क्योंकि शुरुआत में सरकार ने वहीं से स्पेशल ट्रेन चलाई थीं। वहां से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों में यहां से चंद प्रवासियों को ही सीट मिल पाती थी। घर न भेजने पर प्रवासी 3 बार रोड जाम कर चुके थे और रिलीफ कैंपों तक में हंगामा हो रहा था। अधिकारियों को इन्हें संभालना मुश्किल हो रहा था। 

प्रवासियों को करना पड़ा लंबा इंतजार  

ऐसा नहीं है कि प्रवासियों को यह ट्रेन रजिस्ट्रेशन कराते ही मिल गई हो। उन्हें इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। बिहार के बेतिया जिला निवासी अजय कुमार ने बताया कि वह अमृतसर में काम करता था। लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो पैदल ही घर के लिए चल दिया। यमुनानगर में पुलिस ने रोक दिया। 18 दिन से रिलीफ कैंप में था। पहले दिन से वहां पर पुलिस कह रही थी कि एक दो दिन में ट्रेन से भेज दिया जाएगा। 18 दिन बाद ट्रेन में बैठे हैं। 

समाजसेवियों ने श्रमिकों को पिलाई लस्सी, फ्रूटी

प्रवासियों को लेकर सभी ने हमदर्दी दिखाई। किसी ने उन्हें खाना दिया तो किसी ने लस्सी। कुछ लोग तो रेलवे स्टेशन के पास अपनी गाड़ी में पानी लेकर पहुंचे और वहां पर प्रवासियों को दिया। कुछ ने प्रवासियों को लस्सी तक दी। आरएसएस के वर्करों ने खाना, पानी हर प्रवासियों को दिया। इसके साथ ही कुछ ने तो फ्रूटी भी बांटी।

केंद्रीय राज्य मंत्री कटारिया का पत्र आया काम, 3 ट्रेनें उन्हीं के पत्र पर रेलवे ने चलाई

लॉकडाउन के बाद से ही प्रवासी पैदल जा रहे थे, लेकिन यमुनानगर में उन्हें यहां से भेजने के लिए ट्रेन का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। 20 मई को हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान जेके बिहानी ने केंद्रीय राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया को स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए मांग पत्र दिया था। इस पर मंत्री कटारिया ने पत्र केंद्रीय रेल मंत्री को लिखा। इसमें उन्होंने प्लाइवुड एसोसिएशन के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि यमुनानगर में बिहार के 10 हजार, पश्चिम बंगाल के 5 हजार, ओडिसा के 1200 और आसाम के 600 श्रमिक हैं। इनके लिए श्रमिक ट्रेन यमुनानगर से चलाई जाए। उसी दिन कटारिया ने कहा था कि यमुनानगर से ही ट्रेन चलेगी। इस पर शनिवार को रेलवे ने इन ट्रेनों की मंजूरी दे दी थी।

ट्रेन चलते ही रुक गई, चेन पुलिंग का शक था, श्रमिकों के चेहरे मुरझाए 

दोपहर 12 बजे जैसे ही पहली ट्रेन रवाना हुई तो वह चंद कदम पर चलते ही रोकनी पड़ी। क्योंकि ट्रेन ड्राइवर के पास संकेत पहुंचा था कि चेन पुलिंग हो गई। लेकिन इस दौरान यह पता नहीं चल पाया कि कौन से डिब्बे से चेन पुलिंग हुई। क्योंकि किसी भी डिब्बे से प्रेशर लीक नहीं हुआ था। इसके बाद लगा कि कोई और दिक्कत आ गई। ट्रेन में बैठे प्रवासियों के चेहरे मुरझा गए। 10-15 मिनट तक इंजन और अन्य सिस्टम चेक किया गया। सब ठीक मिलने के बाद ट्रेन को रवाना किया गया।



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